आपने भी सुना:जिस अधिकारी ने खाई थी काऊ के समर्थकों की मार,उसको मेगा प्रमोशन दे गई सरकार

जिस अधिकारी ने खाई थी काऊ के समर्थकों की मार,उसको मेंगा प्रमोशन दे गई सरकार

देहरादून: उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा विभाग में एक महत्वपूर्ण पदोन्नति की खबर ने सुर्खियां बटोरी हैं। अपर निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा तथा अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण के पद पर कार्यरत अजय कुमार नौडियाल को अब निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा के पद पर पदोन्नत किया गया है।

 

उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी आदेश (संख्या 37/463/XXIV शिक्षा अनुभाग-2/2019, ई-55529) के अनुसार, यह पदोन्नति 26 फरवरी 2026 को जारी की गई। आदेश में उल्लेख है कि नौडियाल को पहले के वेतनमान (₹1,31,100-2,16,600) से बढ़ाकर नए वेतनमान (₹1,44,200-2,18,200) वाले पद पर नियुक्त किया गया है। पदोन्नति प्रभावी तिथि से लागू मानी गई है, और अधिकारी को पद ग्रहण प्रमाण-पत्र शासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा डिजिटली हस्ताक्षरित है।

 

यह विकास तब सामने आया है, जब कुछ दिन पहले (21-22 फरवरी 2026) देहरादून के प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ और उनके समर्थकों के साथ निदेशक अजय कुमार नौडियाल के बीच हुए विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। विवाद एक सरकारी स्कूल के नाम परिवर्तन के मुद्दे पर शुरू हुआ, जो मारपीट, गाली-गलौज और फर्नीचर तोड़फोड़ तक पहुंच गया। नौडियाल ने विधायक और उनके साथ आए लोगों पर हमला, अभद्रता और जान से मारने की धमकी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर रायपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई। विधायक पक्ष ने भी अलग शिकायत की। घटना के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में आक्रोश देखा गया, और कुछ संगठनों ने कार्यबहिष्कार का ऐलान भी किया। विधायक उमेश शर्मा काऊ ने बाद में मामले में माफी मांगी।

 

पदोन्नति की इस खबर के आने से सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने इसे घटना से जोड़कर व्यंग्य किया है। एक वायरल पोस्ट में लिखा गया है:

“उत्तराखंड में किसी अधिकारी को अपना प्रमोशन करवाना है तो पिटे, कुटे और बढ़े। सौजन्य से: ‘विधायक की मार खाओ और प्रमोशन पाओ योजना’ उत्तराखंड सरकार”

 

ऐसी टिप्पणियां X (पूर्व ट्विटर), फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल रही हैं, जहां लोग इसे सरकारी तंत्र में राजनीतिक दबाव, विडंबना या सिस्टम की कमजोरी के रूप में देख रहे हैं। कुछ यूजर्स ने इसे हास्य के साथ शेयर किया है, जबकि अन्य ने गंभीर सवाल उठाए हैं। यह घटना और पदोन्नति की खबर राज्य में शिक्षा विभाग और राजनीतिक माहौल पर नई बहस छेड़ रही है।

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