चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के चलते बदलेगा घटस्थापना का समय, 11 अक्टूबर को अभिजित् मुहूर्त में होगी कलश स्थापना: बद्रीनाथ व्यासपीठ से अलंकृत आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं

चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के चलते बदलेगा घटस्थापना का समय, 11 अक्टूबर को अभिजित् मुहूर्त में होगी कलश स्थापना

 

देहरादून के आचार्य शिवप्रसाद ममगांई का धर्मशास्त्रीय निर्णय, सुबह के बजाय 11:41 से दोपहर 12:28 बजे तक स्थापना की सलाह
देहरादून। शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से होगा। इस बार नवरात्रि की घटस्थापना को लेकर चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग की स्थिति के कारण विशेष धर्मशास्त्रीय निर्णय सामने आया है। देहरादून के विद्वान आचार्य शिवप्रसाद ममगांई के अनुसार, इस वर्ष सामान्य प्रातःकालीन मुहूर्त के बजाय अभिजित् मुहूर्त में कलश स्थापना करना अधिक शास्त्रसम्मत रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटस्थापना के लिए 12 अक्टूबर तक प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि 11 अक्टूबर को प्रतिपदा तिथि के भीतर ही विधि-विधान से कलश स्थापना की जानी चाहिए।
सुबह के मुहूर्त में क्यों नहीं होगी घटस्थापना?
आचार्य शिवप्रसाद ममगांई के अनुसार, 11 अक्टूबर को देहरादून में आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि रात लगभग 9:32 बजे तक रहेगी। वहीं चित्रा नक्षत्र रात लगभग 10:32 बजे तक और वैधृति योग रात लगभग 9:05 बजे तक प्रभावी रहेगा। ऐसे में सुबह के समय दोनों की स्थिति होने के कारण सामान्य प्रातःकालीन मुहूर्त में घटस्थापना से बचने की सलाह दी गई है।
उन्होंने बताया कि रुद्रयामल सहित विभिन्न धर्मशास्त्रीय प्रमाणों में चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग से युक्त प्रतिपदा के दौरान कलश स्थापना के लिए विशेष नियम बताए गए हैं। ऐसी स्थिति में दोषयुक्त समय को छोड़कर प्रतिपदा के भीतर उपयुक्त मुहूर्त में पूजा-अर्चना करने का विधान है।
दोपहर 12 बजे के आसपास कलश स्थापना शुभ
आचार्य ममगांई द्वारा दी गई देहरादून की स्थानीय गणना के अनुसार, रविवार को अभिजित् मुहूर्त सुबह 11:41 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक रहेगा। इस अवधि में घटस्थापना करना उपयुक्त बताया गया है। श्रद्धालु विशेष रूप से दोपहर 12 बजे के आसपास कलश स्थापना कर सकते हैं।
12 अक्टूबर तक इंतजार करने की जरूरत नहीं
धर्मशास्त्रीय निर्णय के अनुसार, चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग की स्थिति को देखते हुए नवरात्रि की शुरुआत अगले दिन द्वितीया तिथि में करने की आवश्यकता नहीं है। भविष्यपुराण और कात्यायन के प्रमाणों का उल्लेख करते हुए आचार्य ने प्रतिपदा के भीतर ही दोष-परिहार के साथ नवरात्रि पूजन आरंभ करने की व्यवस्था बताई है।
श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
नवरात्रि प्रारंभ: रविवार, 11 अक्टूबर 2026
घटस्थापना का अनुशंसित समय: सुबह 11:41 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
उपयुक्त समय: दोपहर 12 बजे के आसपास
धर्मशास्त्रीय निर्णय: आचार्य शिवप्रसाद ममगांई
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
आचार्य शिवप्रसाद ममगांई, बदरीकाश्रम ज्योतिष्पीठ एवं व्यास पदालंकृत, देहरादून के अनुसार, इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का विधिवत शुभारंभ 11 अक्टूबर को ही होगा। श्रद्धालुओं को स्थानीय पंचांग और निर्धारित मुहूर्त के अनुसार मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने की सलाह दी गई है।

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