गैरसैंण में धामी सरकार के नाम बना नया रिकार्ड चार साल में सबसे अधिक समय तक चलाया सत्र

विधानसभा का बजट सत्र सार्थक बहस और राजनीतिक टकरावों के एक मिश्रित अनुभव के साथ समाप्त हो गया। पांच दिन की इस अवधि में भावनात्मक पल, हंगामेदार जिरह और पक्ष विपक्ष के बीच गतिरोध भी देखने को मिला। समर कैपिटल भराड़ीसैंण में आयोजित हुआ यह सेशन पहला ऐसा सत्र है जो तय की गई समय सीमा तक पूरा चला। इसमें मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami का संबोधन आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। वह विकसित उत्तराखण्ड के संकल्प और आगे के रोडमैप पर बोले। दो घण्टे तक बोलते रहे, जो अपनेआप में एक रिकॉर्ड बन गया। सदन में इतना लम्बा भाषण शायद ही पहले उत्तराखण्ड के किसी मुख्यमंत्री ने दिया हो। सरकार की उपलब्धियों और नीतियों का विस्तृत ब्यौरा दमदार तरीके से उन्होंने सदन के सामने रखा। इसके लिए आंकड़ों का सहारा लिया गया। पूरे होमवर्क के साथ वह सदन में आए थे। इस पूरी कवायद में ‘स्मार्ट सिटी’ की योजना और ‘बदरी गाय रिसर्च सेंटर’ की स्थापना गैरसैंण के हिस्से में आयी। यानि इस दफा गैरसैंण ‘गैर’ नहीं रहा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जानते थे कि यह वर्तमान विधानसभा का अंतिम पूर्णकालिक बजट सत्र है जिसका सियासी संदेश चुनावी दृष्टि से बेहद अहम रहेगा। लिहाजा, आमतौर पर शांत और संयमित रहने वाले धामी ने इस बार आक्रामकता को चुना। उन्होंने तफसील के साथ अपनी बात रखी। तेवर भी दिखाए। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर जोरदार हमला किया। अपने सम्बोधन की शुरुआत उन्होंने जवाबदेही के साथ की। हिसाब-किताब देते हुए कहा कि वह कोरी घोषणाएं नहीं करते। उनके द्वारा मुख्य सेवक के रूप में की गई 3885 घोषणाओं में से 2408 घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं और बाकी पर तेजी से काम जारी है। ये काम धरातल पर देखे जा सकते हैं। परम्परागत तौर पर खनन और आबकारी को लेकर लगने वाले आरोपों पर भी वह खुलकर बोले। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब प्रदेश में खनन गतिविधियां बाहुबलियों और दबंगों के भरोसे छोड़ दी गई थीं। नियमों की खुलेआम अनदेखी होती थी और राज्य का राजस्व खनन माफिया और उनके आकाओं की जेब में चला जाता था। उस समय खनन से मिलने वाला राजस्व लगभग 400 करोड़ रुपये था, जो आज बढ़कर 1200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

शराब नीति पर भी मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष को आइना दिखाया। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के कालखण्ड पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वर्ष 2012 से 2017 का समय ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ का दौर था। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार का पूरा ध्यान केवल शराब नीति पर केंद्रित था और मुख्यमंत्री सचिवालय तक लाइसेंस के बदले नकदी की नीति में उलझा हुआ था। उस दौर के स्टिंग ऑपरेशनों ने पूरे देश में उत्तराखंड की छवि को नुकसान पहुंचाया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सत्य, तथ्य और आंकड़े विपक्ष को अच्छे नहीं लगेंगे क्योंकि उनके लिए यह ‘आउट ऑफ सेलेबस’ सा है। राष्ट्रीय राजनीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने राष्ट्रहित के बड़े फैसले लेने का साहस नहीं दिखाया। धारा 370 हटाने, तीन तलाक समाप्त करने और प्रभु श्रीराम मंदिर के निर्माण जैसे ऐतिहासिक निर्णय वर्षों तक टाले गए और अब प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में इन संकल्पों को सिद्धि में बदला गया।

समान नागरिक संहिता, सख्त भू कानून, लैंड जेहाद, सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण जैसे मामलों का सिलसिलेवार जिक्र कर धामी ने कांग्रेस की जबरदस्त घेराबंदी की। कोटद्वार के मोहम्मद दीपक प्रकरण को भी उन्होंने सलीके से छुआ। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के तमाम युवाओं ने अलग-अलग क्षेत्रों में देश के विकास में बड़ा योगदान दिया है। लेकिन कांग्रेस के बड़े नेता ने उनमें से किसी एक से भी मिलकर उनका हौसला नहीं बढ़ाया। उन्होंने सिर्फ दीपक को मिलने के लिए अपने घर इसलिए बुलाया क्योंकि उसने अपने नाम के आगे ‘मोहम्मद’ लगाया था। जब तक दीपक के आगे मोहम्मद नहीं लगा था उन्हें यह नाम अच्छा नहीं लगा रहा था। धामी ने यह मसला यूं ही सदन में नहीं उठाया। वह जानते हैं कि हार्डकोर हिन्दुत्व ही एक ऐसा मुद्दा है जिसे लेकर कांग्रेस की ओर से कही जाने वाली बातों पर जनता फिलहाल विश्वास करने को तैयार नहीं है।

कुल मिलाकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की परफार्मेंस के लिहाज से बजट सत्र शानदार रहा। पांच दिन में 41 घंटे 10 मिनट रिकॉर्ड समय तक सदन की कार्यवाही चली। दरअसल, सत्ता पक्ष और विपक्ष पर चुनावी वर्ष होने का दबाव था। विपक्ष नहीं चाहता था कि उन पर सदन न चलने देने के आरोप की पुष्टि हो जाए और सत्ता पक्ष चाहता था कि सदन पूरा चले ताकि सरकार अपनी उपलब्धि, नीति और रोडमैप का बखान कर सके। बात-बात पर सदन में हंगामा और वॉक आउट करने वाला विपक्ष योजनाबद्ध तरीके से सरकार की घेराबंदी करता रहा। यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, काजी और हरीश धामी शुरू से अंत तक सरकार पर हमलावर रहे। इधर, कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा और भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान जरूरत पड़ने पर संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल को कवर करते नजर आये। यह भी सच है कि सदन फ्लोर मैनेजमेंट से ही लम्बा और निर्बाध चलता है। इसके लिए धामी सरकार को अच्छे मार्क्स दिए जाने चाहिए। हां ! चार साल के कार्यकाल में गैरसैंण में सर्वाधिक सत्र आयोजित करने का रिकॉर्ड भी धामी सरकार के नाम दर्ज हो गया। ऐसे में मुख्यमंत्री धामी की ‘ब्रांड वैल्यू’ में इजाफा तो होना ही है।

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