प्रसिद्ध लोक रंगकर्मी प्रोफेसर दाताराम पुरोहित को प्रदान किया जाएगा

प्रसिद्ध लोक रंगकर्मी प्रोफेसर दाताराम पुरोहित को प्रदान किया जाएगा

“उत्तराखण्ड के गांधी इंद्रमणि बड़ोनी सम्मान-2026”

 

समाज, संस्कृति, लोकज्ञान एवं जनसरोकारों के प्रति आजीवन समर्पित व्यक्तित्वों को सम्मानित करने हेतु स्थापित “उत्तराखण्ड के गांधी इंद्रमणि बड़ोनी सम्मान” के चतुर्थ संस्करण के लिए इस वर्ष उत्तराखण्ड के सुप्रसिद्ध लोक रंगकर्मी, चिंतक, लोकसंस्कृति के पुरोधा एवं वरिष्ठ शिक्षाविद प्रोफेसर दाताराम पुरोहित का चयन किया गया है। यह सम्मान उन्हें उत्तराखण्ड के गांधी स्वर्गीय इंद्रमणि बड़ोनी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर 18 अगस्त, 2026 को देहरादून में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया जाएगा।

 

यह सम्मान स्वर्गीय इंद्रमणि बड़ोनी जी की स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन, लोकसंस्कृति संरक्षण तथा जनजागरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनका सम्पूर्ण जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास, सम्मान और सांस्कृतिक अस्मिता का संदेश देता है।

 

इंद्रमणि बड़ोनी सम्मान की स्थापना वर्ष 2023 में की गई थी। अब तक यह सम्मान निम्न विभूतियों को प्रदान किया जा चुका है—

 

– वर्ष 2023 में उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति के प्रख्यात संवाहक एवं ढोल वादक  शिवजनी

– वर्ष 2024 में उत्तराखण्ड के सुप्रसिद्ध लोकगायक एवं सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक गढ़रत्न नरेन्द्र सिंह नेगी।

– वर्ष 2025 में बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता एवं सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद  विजय जड़धारी ।

 

सम्मान के अंतर्गत ₹51,000/- की सम्मान राशि, स्मृति पत्र, स्मृति चिन्ह तथा अंगवस्त्र प्रदान किए जाते हैं।

 

प्रोफेसर दाताराम पुरोहित उत्तराखण्ड की लोकपरंपराओं, लोकसाहित्य, संस्कृति, इतिहास और सामाजिक चेतना के गंभीर अध्येता एवं संवाहक रहे हैं। उन्होंने अपने लेखन, शोध, शिक्षण एवं सामाजिक सक्रियता के माध्यम से उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लोकजीवन की गहरी समझ, सामाजिक प्रतिबद्धता तथा जनपक्षधर दृष्टि ने उन्हें राज्य के अग्रणी लोकचिंतकों में विशिष्ट स्थान दिलाया है।

 

उनका कार्य केवल अकादमिक जगत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने लोकसंस्कृति और लोकज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टि के साथ देश-विदेश तक पहुंचाने का उल्लेखनीय कार्य किया है। उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विविधता तथा जनमानस की आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति देने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

 

“इंद्रमणि बड़ोनी सम्मान” केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की लोकचेतना, सांस्कृतिक अस्मिता, सामाजिक सरोकारों और जनसंघर्षों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

 

यह सम्मान पूर्णतः जन सहभागिता एवं जन सहयोग से आयोजित किया जाता है।

 

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